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•किसानों का झुकाव मिलेट्स की खेती की ओर बढ़ रहा है, आवश्यकता है की उन्हें मिले उनका अधिकार •सरकारी एमएसपी न मिलने तक पूरे गांव से मिलेट्स खरीदेंगी व मदद भी करेंगी- श्रेया

हरदासपुरा व आसपास के किसानों ने ली शपथ ,अब सिर्फ मोटे अनाज की करेंगे खेती, न जलेगी पराली ,न ही पानी की रहेगी चिंता

•गांवों में भी अधिकतर लोग बी पी ,डायबिटीज से ग्रस्त

चंडीगढ़, 24 अगस्त-
◽बदलते पर्यावरण और खेती-किसानी में बढ़ते लागत के बीच कौन सी फसल उपजाई जाए, इस बात को लेकर किसानों के बीच लगातार चिंता का माहौल रहता है। हालांकि, किसानों की चिंता को दूर करने का एक शानदार ऑप्शन मोटे अनाज की खेती हो सकती है। ◽मोटा अनाज यानी मिलेट की खेती यूं तो कई इनोवेटिव बात नहीं है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की ओर से 2023 को मिलेट ईयर घोषित किए जाने के बाद इसकी चर्चा और डिमांड दोनों बढ़ी है।

 हैदराबाद स्थित भारतीय कदन्न (मोटा अनाज) अनुसंधान संस्थान (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट्स रिसर्च- IIMR) एक अनुमान के मुताबिक भारत 170 लाख टन से अधिक मोटे अनाज का उत्पादन करता है। ये एशिया का 80 प्रतिशत और वैश्विक उत्पादन का 20 प्रतिशत है , ऐसे तथ्यों का हवाला देकर डाइटिशियन श्रेया ने किसान भाइयों को मिलेट्स की खेती करने का आह्वान किया ।

◽ मिलेट क्रांति के अभियान के तहत हरदासपुरा गांव में मिलेट गर्ल ( डायटीशियन श्रेया) ने कुलवंत सिंह, जगदेव सिंह व अन्य किसानों व उनके परिवार वालों को दी जनाकारी । जब किसानों ने चिंता जताई कि वो मिलेट्स की फसल तो उगा रहे हैं लेकिन फसल की बिक्री को लेकर असमंजस की स्तिथि बनी हुई है , तो श्रेया ने कहा कि वो सरकार तक किसानों की आवाज पहुचाने की कोशिश करेंगी ताकि हैदराबाद जैसा रिसर्च सेंटर पंजाब या हरियाणा में भी शुरू हो ।
◽गौरतलब है कि श्रेया ने अपनी एन जी ओ आहारिका के माध्यम से मिलेट्स किसानों से सीधी खरीद शुर

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